दैनिक देश मोर्चा हरिओम जोनवाल
बूंदी : नैनवा खेल राज्य मंत्री अशोक चांदना के विधानसभा क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारी इस कदर बेलगाम हो गए हैं कि अब लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी पर भी लगाम लगाने का प्रयास करने लगे हैं। अब से सत्ता की सरपरस्ती कहें या कमजोरी या राज्य मंत्री अशोक चांदना की निष्पक्ष छवि वाली राजनीति को धूमिल करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की साजिश। खेर बरहाल कुछ भी हो चाहे इन प्रशासनिक अधिकारियों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त हो या सत्तापक्ष की कमजोरी। मगर वर्तमान समय में लगातार प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा आम जनता को छोड़िए अब अब तो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पत्रकारों के साथ भी अभद्रता करने से नहीं चूकते साथ ही उनकी रिपोर्टिंग के कार्य में भी राज कार्य बाधा बता कर रोकने का प्रयास किया जा रहा है ऐसा ही एक मामला अभी पूर्व में देई सामुदायिक चिकित्सालय के चिकित्सक सतीश सक्सेना द्वारा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार गणेश शर्मा के साथ किए गए दुर्व्यवहार के रूप में सामने आया। जिसमें विगत कई दिनों से चिकित्सक के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थी कि चिकित्सक द्वारा अनावश्यक रूप से ओपीडी टाइम पर मरीजों को देखने के पैसे लिए जा रहे हैं साथ ही कमीशन का धंधा जोरों पर है और इसी के चलते मरीजों के साथ लगातार दुर्व्यवहार चिकित्सक द्वारा किया जा रहा है।जनता द्वारा इस संदर्भ में प्रशासन को सूचना भी दी गई मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई इन सूचनाओं व घटनाओं के मद्देनजर पत्रकार द्वारा जब इस संदर्भ में जानकारी प्राप्त करने हेतु चिकित्सालय पहुंचे और अपना रिपोर्टिंग का कार्य कर रहे थे कि चिकित्सक सतीश सक्सेना ने संवाददाता पर अनर्गल आरोप लगाते हुए उन्हें धमकी देते हुए राजकार्य में बाधा डालने और रिपोर्ट दर्ज करवाने की धमकी दी और रिपोर्ट दर्ज करवाई। इस तरह से प्रशासनिक अधिकारी द्वारा संविधान से प्रदत्त अभिव्यक्ति की आजादी और आम जनता की आवाज को मुखर करने वाले लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी की गई। तो वही दूसरा मामला फिर नैनवां नगर पालिका में सामने आया जहां पर अधिशासी अधिकारी द्वारा पत्रकारों को घटना के रिकॉर्डिंग करने से रोकते हुए। उन्हें इजाजत लेने की बात कही। इस संदर्भ में जानकारी देते हुए संवाददाता विजय मीणा ने बताया कि नैनवा नगर पालिका में भाजपा के पार्षद गण व वार्ड वासी नगरपालिका के अंतर्गत कस्बे में लगाए जा रहे हैं नलकूपों में भ्रष्टाचार और अनियमितता की जांच व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा को लेकर ज्ञापन देने पहुंचे थे। जिसके लिए घटना समाचार को कवरेज करते हुए पत्रकार अधिशासी अधिकारी के चेंबर में पहुंचे जब वह कवरेज कर रहे थे तो अधिशासी अधिकारी ने उन्हें कवरेज करने से रोकते हुए कहा कि आप कवरेज नहीं कर सकते। यह एक राजकार्य में बाधा है इसके लिए आपको इजाजत लेनी होगी। मैं एक महिला अधिकारी हूं और इसकी इजाजत मैं अभी अपने अधिकारों के तहत आपको नहीं देती आप बाद में मेरी संदर्भ में बाइट ले सकते हैं।
इस संदर्भ में जब मीडिया द्वारा अधिशासी अधिकारी श्रीमती महिमा डांगी से सवाल किए गए तो उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार की रिपोर्टिंग के लिए उस संदर्भ में अधिकारी से इजाजत लेनी होगी इजाजत नहीं लेने की सूरत में यह राजकार्य में बाधा माना जाएगा।। मैं महिला अधिकारी हूं ओर अपने अधिकारों के तहत इस प्रकार की रिपोर्टिंग की स्वीकृति नहीं दूंगी।
अब सवाल यह उठता है कि अधिकारियों द्वारा अपने प्रदत्त अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए लोकतंत्र के प्रहरी के रूप में विख्यात पत्रकारों के साथ इस प्रकार का आचरण , दुर्व्यवहार व अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए। अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया जा सकता है ।तो सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि आम जनता के साथ किन अधिकारियों का व्यवहार किस प्रकार का होगा और कितनी आम जनता की सुनवाई इन अधिकारियों द्वारा की जाती होंगी।अब इसे पद का मद कहें या इन अधिकारियों के आचरण को देखते हुए। इसे सत्ता की कमजोरी कहें कि सत्ता का सरकारों का इन अधिकारियों पर कोई जोर नहीं रहा और यह बेलगाम हो चुके हैं या फिर दूसरा कारण यह भी हो सकता है कि कहीं ना कहीं इनको सत्ता पक्ष का संरक्षण प्राप्त हो जिसके दम पर ही है लोगों के पत्रकारों के अधिकारों का हनन करने से भी नहीं चूक रहे हैं इनमें कोई डर का नामोनिशान नहीं है यह सोचते हैं कि उन्हें सत्ता की सरपरस्ती प्राप्त है उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। या फिर सरकार और मंत्री इन अधिकारियों के आगे नतमस्तक हो चुके हैं। वर्तमान समय में क्षेत्र में जिस प्रकार और भ्रष्टाचार और अधिकारियों की तानाशाही का बोलबाला है। इससे तो यही लगता है कि कहीं ना कहीं सत्ता व वह सरकारी अधिकारियों की लोबी का मेलजोल आम जनता के विरुद्ध कार्य कर रहा है।

