विजय डोमेला
12 दिन से उपखंड कार्यालय की चौखट पर न्याय मांग रहे धरणारथीयो ने आज दिनांक 19 सितंबर 2021 रविवार को बामन गांव के ग्रामीणों ने प्रशासन के निष्क्रिय कार्यशैली के प्रति विरोध प्रदर्शन करते हुए उपखंड अधिकारी कार्यालय परिसर में भैंसे लेकर पहुंचे और भैंसों के आगे बाजा बजा कर गूंगे बहरे प्रशासन को जगाने का प्रयास किया। अपने विरोध के इस नायाब तरीके के साथ ग्रामीणों द्वारा प्रदर्शन कर न्याय की मांग की गई। ग्रामीणों ने इस संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि लगातार आज 13 दिन हो गए। लेकिन प्रशासन है कि सुनने का नाम नहीं ले रहा है ऊपर से अब तो धमकी भरे लहजे में धरना हटाने के लिए दबाव भी बनाया जा रहा है ।प्रशासन के इस गूंगे बहरे रवये के खिलाफ आज प्रदर्शन करते हुए हम पीड़ित अपने मवेशि को लेकर यहां पहुंचे क्योंकि हमारे आवास व जमीन तो पानी में डूब चुकी है तो इन मवेशियों को कहां रखें जब 13 दिन से हम यहां हैं तो मवेशी भी यही रहेंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यशैली के प्रति विरोध जताते हुए। उपखंड अधिकारी कार्यालय पर भैंस के आगे बाजा बजा कर अपना विरोध दर्ज करवाया। जैसा की विधित है भोमपुरा बांध में बामन गांव के ग्रामीणों कृषि भूमि , आवास जलमग्न हो जाने के पश्चात ग्रामीणों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया। सरकार से न्याय की मांग करते हुए अपनी जमीनों को वापस लेने की मांग कर रहे है। ग्रामीण पिछले 13 दिनों से नैनवा एसडीएम कार्यालय के बाहर बैठे हुए हैं मगर प्रशासन की ओर से उन्हें अब तक कोई माकूल जवाब नहीं मिला। आखिर प्रशासन की क्या मजबूरी है कि वह ग्रामीणों की न्यायोचित मांग को भी सुनाअनसुना कर रहा है। जबकि प्रशासन द्वारा बांध निर्माण को अवैध करार दिया गया है अगर बांध अवेध है तो प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहा हैं जब किसी सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण कर लिया जाता है तो उसे प्रशासन द्वारा तोड़ दिया जाता है यहां प्रशासन मूकदर्शक बनकर क्यों बैठा है। सवाल पैदा होता है कि जब प्रशासन द्वारा बांध को अवैध माना जा रहा है तो जब बांध का निर्माण हो रहा था तब प्रशासन मूकदर्शक बन कर क्यों बैठा हुआ था उस वक्त प्रशासन ने सक्रियता क्यों नहीं दिखाई। बांध निर्माण की खबरें बांध निर्माण के भूमि पूजन के दिन से ही मीडिया की सुर्खियां बनी हुई थी। पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में देखा जा रहा है कि अतिक्रमणकारियो के हौसले बुलंद हैं और जनता के मामले को इसी प्रकार लटकाया जा रहा है जनता के सामने केवल धरने और प्रदर्शन के सिवा कोई रास्ता न्याय की मांग को रखने का नजर नहीं आता जब विरोध प्रदर्शन किए जाते हैं तो प्रशासन द्वारा सख्ती से निपटा जाता है।तो आखिर अब एक आमआदमी अपनी फरियाद लेकर जाए तो कहां जाए। पिछले कुछ दिनों से देखा जा रहा है कि नैनवा एसडीएम कार्यालय के बाहर का स्थान निश्चित धरना स्थल के रूप में स्थापित होने जा रहा है। जहां पर आए दिन लोग अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन से न्याय की मांग को लेकर धरने कर रहे हैं। मगर किन्ही मामलों में आम आदमी को न्याय मिला हो ऐसा दिखाई नहीं देता। ऐसा ही एक प्रकरण अभी कुछ दिनों पूर्व एक भूखंड पर विवाद को लेकर उत्पन्न हुआ जिसमें एक महिला की जलने से मौत हो गई यदि उस प्रकरण में भी वक्त रहते प्रशासन उचित कदम उठाता तो शायद एक मासूम महिला को अपनी जान से हाथ ना धोना पड़ता। फिर आज हालात वही हैं 25 परिवार अपनी आजीविका के डूब जाने के बाद न्याय की मांग को लेकर एसडीएम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं मगर प्रशासन अभी तक कोई समाधान नहीं निकाल पाया क्या इन गरीबों को न्याय मिलेगा या एक बार फिर प्रशासन की दमनकारी नीति सामने आएगी। जिस तरीके से प्रशासन की कार्यशैली दिखाई दे रही है शायद प्रशासन भी किसी पीड़ित की बलि का इंतजार कर रहा है देखते हैं आखिरकार प्रशासन अपनी हठधर्मिता वह अपने नकारे पन को कैसे खत्म कर पीड़ितों को न्याय दिला सकता है यह तो वक्त ही बताएगा या फिर यूं मान ले कि कहीं सत्ता का दबाव या सत्ता की चाटुकारिता में व्यस्त तो नहीं है नैनवा प्रशासन

