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कानपुर…समान नागरिक संहिता: राष्ट्रीय अखंडता के लिए आवश्यक क्यों?

दैनिक देश मोर्चा/अभिषेक कठेरिया

कानपुर मे रास्ट्रीय अखंडता के लिए आवश्यक क्यो विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन भारत उत्थान न्यास द्वारा किया गया जिसमें न्यास की विधि प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय सचिव, सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता सुमित्रा चौधरी ने कहा कि समरसता और सौहार्द को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि नागरिकों के लिए यह कानून बनना चाहिए इससे महिलाओं के अधिकार और मजबूत व सुरक्षित होंगे। विशिष्ठ वक्ताओं में महर्षि विश्वविद्यालय, नोएडा की डिप्टी डीन, प्रोफेसर अन्नू मेहरा ने कहा कि समाज में अनेकों असमानताएं व्याप्त हो गई हैं जिन्हें इस कानून के माध्यम से समाप्त किया जा सकता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता अनूप देशबंधु ने बताया कि आज विश्व के अनेकों देशों में समान नागरिक संहिता लागू हो चुकी है, जिसमें टर्की, फ्रांस जैसे देशों के साथ-साथ हमारे पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश भी शामिल हैं। वहां निर्णय शरीयत के आधार पर नहीं बल्कि समान नागरिक संहिता के आधार पर होते हैं। अन्य प्रमुख वक्ताओं नवीन कौशिक, अधिवक्ता सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली, अश्विन त्रिपाठी, प्रदेश महामंत्री, अधिवक्ता परिषद उत्तर प्रदेश, एडवोकेट प्रकाश चौधरी, गवर्नमेंट काउंसिल राजस्थान हाईकोर्ट, एडवोकेट संदीप जिंदल, सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली,
एडवोकेट कमल गोयतान सोनी, जोधपुर हाईकोर्ट, अधिवक्ता प्रशांत शुक्ला, कानपुर ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष, सुजीत कुंतल ने किया। यहां कृष्ण कुमार जिंदल, शशि अग्रवाल, सरिता पांडे, रिचा अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।